चावल निर्यात में ठहराव !!

भारत के चावल निर्यात में ठहराव, बाजार में मांग धीमी

भारतीय चावल निर्यात कीमतों में इस सप्ताह बहुत कम बदलाव देखा गया। अफ्रीकी देशों से कमजोर मांग और रुपये के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने का दबाव बाजार पर बना रहा।
भारत के 5% टूटे हुए (ब्रोकन) परबॉयल्ड चावल की कीमत इस सप्ताह 333–340 डॉलर प्रति टन रही, जो पिछले सप्ताह के समान है। वहीं, भारत के 5% टूटे हुए सफेद चावल की कीमत 335–340 डॉलर प्रति टन रही।
नई दिल्ली के एक व्यापारी के अनुसार:
“भारत की कीमतें प्रमुख निर्यातक देशों में सबसे कम हैं, फिर भी निर्यात मांग में तेजी नहीं आ रही है।”
उच्च कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार पूंजी निकासी के कारण रुपया अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है, जिससे भारत की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा है।
वियतनाम के 5% टूटे हुए चावल की कीमत गुरुवार को 395–400 डॉलर प्रति मीट्रिक टन रही, जो पिछले सप्ताह के समान है।
हो ची मिन्ह सिटी के एक व्यापारी ने कहा:
“घरेलू आपूर्ति कम हो रही है, लेकिन हमें फिलीपींस द्वारा आयातित चावल पर मूल्य सीमा (Price Ceiling) लगाने के फैसले की चिंता है।”
उन्होंने आगे कहा:
“फिलीपींस वियतनाम का सबसे बड़ा चावल खरीदार है और वहां की किसी भी नीति का असर बाजार पर जरूर पड़ेगा।”
व्यापारियों के अनुसार, कीमतों में बढ़ोतरी का मुख्य कारण यह है कि मिलर्स मजबूत घरेलू बाजार भावना के चलते बिक्री रोककर बैठे हैं।
बैंकॉक के एक व्यापारी ने बताया कि:
“बाजार में मांग अभी भी धीमी बनी हुई है और कोई बड़ी डील नहीं हुई है, हालांकि हांगकांग और अफ्रीकी बाजारों के नियमित ग्राहक छोटे ऑर्डर दे रहे हैं।”
थाईलैंड में आपूर्ति की स्थिति लगभग स्थिर बनी हुई है क्योंकि इस समय नई फसल की बुवाई चल रही है और बाजार आने वाले महीनों में फसल के आकार का इंतजार कर रहा है।
बांग्लादेश में भारी प्री-मानसून बारिश के कारण 2 लाख मीट्रिक टन से अधिक चावल की फसल को नुकसान होने की आशंका है, जिससे कीमतें और बढ़ सकती हैं।
दूसरी ओर, Fitch Solutions की इकाई BMI ने बुधवार को कहा कि:
“वैश्विक चावल बाजार में 2030 तक अधिशेष (Surplus) बने रहने की संभावना है, हालांकि मौसम संबंधी उतार-चढ़ाव अलग-अलग सीजन में उत्पादन को प्रभावित कर सकते